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Friday, February 29, 2008

TPH #043 Battle of the Giants - Mandrake (Indrajal Comics #362)

Watched today a year old movie from disney studio "Bridge to Terabithia". It has been publicised as from the makers of "The chronicles of Narnia". While that one was between ok and good, this movie immensely bored me. Just couldn't get the whole idea. In fact couldn't wait for the end screen to display and put off the player. Surprisingly the movie has managed some rave revies from critics. See this or this. But someone has put it in better words:
That's what worries me- kids are going to be expecting Narnia or Harry Potter and get something completely different. As a result, they won't like it, when they might have liked it if they had had different expectations.
Presented now is another mandrake story or rather two stories. This time scanned by someone else probably by Mr Ajay Mishra.
Download TPH #043 (27 pages, 7.12 MB)

Thursday, February 28, 2008

TPH #042 Registan Ke Garbh Main - Mandrake (Indrajal Comics #V21N06)

Discoverd this wonderful wildlife photogrphy blog by Kalyan Varma. Stunning images. Also liked this photo blog by Suneel Deepak. The man lives in Italy and writes at least four blogs, one each in hindi, english, italian and this photo blog. -------------------- This is a very special Indrajal Comics for me. This is one of those very few surviving members of my original IJC treasure. Well, there are few other but this one is extra special because I still remember the day when I purchased this copy from a nearby book shop. It is 24 years now and much has changed but that shop is still there, though now his son is the owner. I think I have a reasonably good memory when it comes to comics. There is one more comic that I remember purchasing, will be putting it here soon. A good mandrake story this. First I read it as a sunday strip in 'Hindustan'. Sunday strip 171 'El Dorado'. (Deepwoods says its Sunday #149)
Download TPH #0042 (29 pages, 1024px width, 7.53 MB)

Tuesday, February 26, 2008

TPH #041 Disney Today 9122

Update: A new post has been made on ACK blog. Make a trip there and enjoy. ------------------------ The last disney comic I posted is having a part Mickey story. This one is having its second part. India has beaten Sri Lanka to enter the finals of tri series. Hoping to see some good contest in the finals.
Download TPH #041 (30 pages, 1024px width, 8 MB)

Sunday, February 24, 2008

TPH #040 Disney Today 9121

Bought this book some time ago. Or rather it was sold to me by a smart salesperson visiting my home. This is a really wonderful book and I had to spend only Rs 300 for this. The real price, as the back cover declares, is Rs 1495. Now I think it would not have a bad purchase even at that price. the book has a website also.
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What makes a comic blogger continue with same enthusiasm and joy? Perhaps some stats. Here are some: Number of my scanned comics on blogs: 42 (38 on TPH and 4 elsewhere) Total number of comic pages scanned by me (including current comic): 1369 No. of days blogging: 158 that means 8.66 comic page scans per day. Wow.
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Here comes another fine Disney comic. Two Donald stories are extremely hilarious. I enjoyed them immensely. The best way to enjoy a Disney is to read it on your laptop sitting in a comfortable position in bed. It should be your last read before sleep and a fine sleep can be guaranteed.
(29 pages, 1024px width, 7.53 MB)

Saturday, February 23, 2008

हिन्दी ब्लोग्स (चिट्ठों) का संसार

यूं ही ब्लॉग भ्रमण करते कुछ हिन्दी ब्लॉग्स (चिट्ठों) से परिचय हुआ। एक सुखद आश्चर्य की अनुभूति हुई। तो अब स्तरीय हिन्दी भाषी भी ज्यादा से ज्यादा इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। एक बानगी आप भी देखिये: कुछ हिन्दी ब्लोग्स aggregator हैं: http://blogvani.com/ http://chitthajagat.in/ ज्ञान दत्त पाण्डेय जी बता रहे हैं अपने अनुभव और सुझा रहे हैं बचने के कुछ उपाय अपने चिठ्ठे ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल पर।
कुछ दिनों से एक परिवार की आंतरिक कलह के प्रत्यक्षदर्शी हो रहे हैं हम। बात लाग - डांट से बढ़ कर सम्प्रेषण अवरोध के रास्ते होती हुई अंततः लाठी से सिर फोड़ने और अवसाद - उत्तेजना में पूर्णतः अतार्किक कदमों पर चलने तक आ गयी है। अब यह तो नहीं होगा कि संस्मरणात्मक विवरण दे कर किसी घर की बात ( भले ही छद्म नाम से ) नेट पर लायें । पर बहुत समय इस सोच पर लगाया है कि यह सब से कैसे बचा जाये। उसे आपके साथ शेयर कर रहा हूं।
बेहतरीन व्यंग्य लेखन उपलब्ध है आलोक पुराणिक के चिट्ठे पर। ताज़ा अंक देखें यहाँ जिसमें शेयर मार्केट से परेशान गब्बर सिंह अपना दुखडा रो रहा है।
सांभा की एडवाइज पर मैंने जिन शेयरों में इनवेस्ट किया था, उनकी पावर डाऊन पड़ी है। तेरा क्या होगा सांभा-यह धमकी मैंने सांभा को दी भी थी, तो वह हंसकर बोला कि क्या होगा, हद से हद आप ही मार देंगे, आप नहीं मारेंगे ,तो मुझे वह उधार वाले मार देंगे, जिनसे रकम लेकर मैंने तमाम शेयरों में इनवेस्ट किया था। उधर कालिया बता रहा है कि उसके चाचा, मामा, साढ़ू, दामाद जीजा सभी का यही हाल है, सबके शेयरों का पावर आफ हो रखा है। और उधारी वाले सबको परेशान कर रहे हैं। रामगढ़ वाले अब कहने लगे हैं कि गब्बर सिंह तेरे लूटने के लिए कुछ बचा ही ना है। हम तो पहले ही लुट चुके हैं। मैं हैरान था क्योंकि इधर इलाके की पुलिस ने इधर लूटने की मोनोपोली सिर्फ मुझे दी हुई है। ये कौन आ गये मेरे इलाके में लूटने। बाद में पता चला कि लूटने अब मुंबई से आते है, शेयर ऊयर देकर नोट ले जाते हैं। कागज के नोट कहीं और चले जाते हैं, और शेयर का कागज इधर रह जाता है। जिसकी नाव बनाकर बच्चे नाले में डुबा देते हैं। भई, ये क्या नये नये लुटेरे खड़े कर दिये, हमरा तो धंधा ही चौपट हो लिया है।
------------------------------- इश्क में ग़ैरत-ऐ-जज्बात ने रोने ना दिया वरना क्या बात थी, किस बात ने रोने ना दिया । आप कहते हैं कि रोने से ना बदलेंगे नसीब उम्र भर आप की इस बात ने रोने ना दिया ------------------------------- ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी । मगर मुझको लौटा दो वो बचपन का सावन वो काग़ज़ की कश्ती वो बारिश का पानी ।। ------------------------------ कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया और कुछ तल्खि़ए हालात ने दिल तोड़ दिया हम तो समझे थे कि बरसात में बरसेगी शराब आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया ---------------------------- पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसां पाए हैं तुम शहरे मुहब्बत कहते हो, हम जान बचाकर आए हैं ।। होठों पे तबस्सुम हल्का सा आंखों में नमी सी है 'फाकिर' हम अहले- मुहब्बत पर अकसर ऐसे भी ज़माने आए हैं ।। --------------------------- किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी मुझ को एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी और शायद मैं ज़िन्दगी की सहर ले के आ गया क़ातिल को आज अपने ही घर लेके आ गया ता-उम्र ढूँढता रहा मंज़िल मैं इश्क़ की अंजाम ये कि गर्द-ए-सफ़र लेके आ गया साथ ही चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी शबाब की नक़ाब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी लिखा था जिस किताब में, कि इश्क़ तो हराम है हुई वही किताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी
जैसी ख़ूबसूरत गजलें लिखने वाले सुदर्शन फ़ाकिर नहीं रहे। श्रद्धांजलि दे रहे हैं यूनुस खान और मनीष कुमार अपने - अपने चिट्ठों पर। अन्य उल्लेखनीय चिट्ठे हैं: चोखेर बाली
इससे पहले कि वे आ के कहें हमसे हमारी ही बात हमारे ही शब्दों में और बन जाएँ मसीहा हमारे , हम आवाज़ अपनी बुलन्द कर लें ,खुद कह दें खुद की बात ये जुर्रत कर लें ....
घुघूती बासूती
माँ बहुत ही क्रान्तिकारी सी रही थीं जीवन भर । बहुत सी बातें हैं जिनके लिए मैं उनका बहुत आदर करती हूँ । जैसे १२ वर्ष की आयु में जब वे विवाह कर गाँव गईं तो उन्होंने घूँघट निकालने से साफ मना कर दिया । आज चोखेरबाली (href="http://sandoftheeye.blogspot.com/2008/02/blog-post_18.html) में जब बन्धनों की बात हुई तो भी मुझे अपनी माँ पर गर्व हुआ ।
जो न कह सके - Sunil Deepak
कुछ दिन पहले पुरी में जगन्नाथ मंदिर जाने का मौका मिला था, पर वहाँ का भीतरी कमरा जहाँ भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा है वह उस समय बंद था, क्योंकि "यह प्रभु के विश्राम का समय था"। पुजारी जी बोले कि अगर मैं समुचित दान राशि दे सकूँ तो विषेश दर्शन हो सकता है. यानि पैसा दीजिये तो प्रभु का विश्राम भंग किया जा सकता है. भुवनेश्वर के प्राचीन और भव्य लिंगराज मंदिर में, पहले दो पुजारियों में आपस में झड़प देखी कि कौन मुझे जजमान बनाये. भीतर पुजारियों ने सौ रुपये के दान की छोटेपन पर ग्यारह सौ रुपये की माँग को ले कर जो भोंपू बजाया तो सब प्रार्थना और श्रद्धा भूल गया.
निर्मल-आनन्द में अभय तिवारी महान भारतीय क्रिकेट तमाशों (IPL, ICL) की सफलता को लेकर सशंकित लगते हैं , पर अपने ही अंदाज में।
कहा जा रहा है कि क्रिकेट और बौलीवुडीय ग्लैमर का यह संगम सास-बहू को प्राइम टाइम पर कड़ी चुनौती देने को तैयार है। अगर यह सास-बहू को देश के मनोरंजन के आलू-प्याज़ के रूप में नहीं हटा पाया तो कुछ नहीं हटा पाएगा। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि इतने बड़े-बड़े धनपशुओं को हुआ क्या है? हमें तो इस में हिट होने लायक कोई मसाला नहीं दिख रहा- हो सकता है कुछ रोज़ लोग उसके नएपन को परखने के लिए बीबी के हाथ से रिमोट छीनकर क्रिकेट को वरीयता दे दें। मगर एक बार हेडेन और धोनी को एक ही टीम का हिस्सा होते हुए देख लेने के बाद कोई क्यों रोज़-रोज़ बीबी से झगड़ा मोल लेगा॥ मेरी समझ में नहीं आता?
शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय का ब्लॉग पर भी कुछ अच्छा हो रहा है:
शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय, ब्लॉग-गीरी पर उतर आए हैं. विभिन्न विषयों पर बेलाग और प्रसन्नमन लिखेंगे. दोनों ने निश्चय किया है कि हल्का लिखकर हलके हो लेंगे. लेकिन कभी-कभी गम्भीर भी लिख दें तो बुरा न मनियेगा.

Wednesday, February 20, 2008

TPH #039 Antariksha Se Chunouti - Vikram (Sun Comics)

Another old indian comic from the Sun comics. I posted one of these before and once again this Jagjit Uppal - Pradeep Sathe adventure of Vikram, the brave indian spy. The story line is ok and the pictures are good. The second story is of Inspector Garud as before. This is 1978 comic.
Download TPH #039 (28 pages, 1024px width, 7.50 MB)

Sunday, February 17, 2008

TPH #038 Aatank Ke Ghere - Flash Gordon (Indrajal Comics V20N16)

----------------------------------------- [Update: 19 Feb 08] Comic Crazy has prepared this wonderful header for TPH. Fantastic work. Thank you comic crazy. ----------------------------------------- A lot many two part indrajals appeared on different blogs this month. I am going to do the opposite. Here comes an IJC with two short but complete stories. The Flash story is a sweet one. No fighting, no acrobatic flights, but a simple but imaginative story about some prisoners who were sent to another planet as part of their prison term but in an attempt to set themselves free, unintentionally reach another place and found the conditions not so unsupportive untill ... The second one is a very short mandrake story. Original strip number S169 Center stage terror. It ran for only 7 weeks from 7 Feb 1982 to 21 Mar 1982. IJC has full seven pages. The condition of physical copy is not very good, so scans are not of ultimate quality. In fact it was a challenge to scan this and I am happy that I could do that finally. My copy is also not having front cover so it is taken from ICC's post of covers of vol. 20. Thanks to him and to original scanner (if it is someone else). Adding Hindi title on cover is my work.
Download TPH #038 (28 pages, 1024px width, 7.75 MB)

Friday, February 15, 2008

ACK thumbnails and Creation of 'The Fisherman' cover by Comic Crazy

------------------ [Update] A new comic has been posted on ACK blog by CW. Enjoy it. ------------------ Some time ago I had made a post about the fantastic colouring work done by comic crazy for two b/w pages of mandrake sunday strip for MTM. I had wished that he should share some of the experience about his work. Meanwhile he has also designed some covers for the daily strips for MTM. He has send me this information on how he made one of those covers. Just take a look at this fabulous work. He has taken different panels from another mandrake daily strip 'mandrake's marriage' and created this amazing stuff. The explaining graphic itself is a wonderful display of creativity and any art lover would appreciate this.
Another master-piece from our 'Digital Perfection'. Isn't it? ------------------------------------------------------- Enjoy few more ACK cover thumbnails.